नई दिल्ली में प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में नवनिर्मित प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली ऐतिहासिक बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन हुई इस बैठक में देशहित में कई महत्वपूर्ण और अभूतपूर्व निर्णय लिए गए।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ केवल एक भवन नहीं, बल्कि स्वदेशी सोच, आधुनिक दृष्टिकोण और 140 करोड़ देशवासियों की सामर्थ्य पर आधारित राष्ट्रसेवा का केंद्र है। मंत्रिमंडल ने संकल्प लिया कि यह परिसर कर्तव्य-यज्ञ की भावना के साथ राष्ट्रहित में निरंतर कार्य करता रहेगा। इस दौरान वैदिक मंत्र ‘यद् भद्रं तन्न आ सुवः’ का उल्लेख करते हुए शुभ और कल्याणकारी विचारों को निरंतर अपनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
बैठक में कहा गया कि ‘सेवा तीर्थ’ नए भारत के आत्मविश्वास और नव निर्माण का प्रतीक है। आजादी के बाद दशकों तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा, जबकि नया परिसर ब्रिटिश कालीन अस्थायी बैरकों के स्थान पर विकसित किया गया है। इसे औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे बढ़ते हुए आधुनिक और आत्मनिर्भर भारत की पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल ने दोहराया कि यहां लिया गया हर निर्णय ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित होगा। शासन-प्रशासन की कार्यसंस्कृति संविधान के मूल्यों—गरिमा, समानता और न्याय—के अनुरूप संचालित की जाएगी। पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित व्यवस्था को और सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।
सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि बीते वर्षों में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिली है, जबकि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से लगभग 80 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई गई। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण और 4 करोड़ से ज्यादा पक्के घर बनाए गए। जल जीवन मिशन के माध्यम से 12 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाया गया।
मंत्रिमंडल ने ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सिद्धांत के तहत जीएसटी, डीबीटी और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों को पारदर्शी और प्रभावी प्रशासन की दिशा में अहम कदम बताया। लक्ष्य रखा गया कि तेज रफ्तार सुधारों के माध्यम से भारत को निकट भविष्य में विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया जाए।
बैठक में ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को दोहराते हुए विश्वास व्यक्त किया गया कि ‘सेवा तीर्थ’ से संचालित नई कार्यशैली देश को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।